Direction and position of 54 tirthankar in nandishwar deep
संक्षेप में बात समझते हैं।
1. नंदीश्वर द्वीप में कितने जिनालय हैं?
जैन आगमों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार नंदीश्वर द्वीप में “बावन (52) शाश्वत जिनालय” हैं – ना कि 54।
इसी कारण पूजा‑पाठ, पूजन‑पाठ में भी “नंदीश्वर द्वीप के बावन जिनालय” ही बोला जाता है। इसलिए 54 तीर्थंकरों की “दिशा और पोज़ीशन” वाला प्रचलन शास्त्रीय नहीं माना जाता, अमूमन यह या तो:
- किसी विशेष मॉडल / मंदिर‑निर्माण की लोकरीति
- 52 की जगह 54 का साधारण भ्रम
होता है।
---
2. नंदीश्वर द्वीप की संरचना – दिशा के आधार पर
शास्त्रीय रूप से नंदीश्वर द्वीप में:
- चारों दिशाओं (पूव॔, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) में रचना होती है।
- वहाँ ४ अंजनगिरि पर्वत, १६ दधिमुख, ३२ रतिकर आदि वर्णित हैं।
- इन्हीं के बीच‑बीच में यह ५२ जिनालय बने माने जाते हैं।
- इन जिनालयों में २४ तीर्थंकरों की रत्न‑स्वर्णमय प्रतिमाएँ विराजमान हैं
सामान्य रूप से मान्यता यह है कि:
- जिनालयों और प्रतिमाओं का मुख प्रायः मेरु की ओर / भीतर की ओर माना जाता है,
- हर दिशा में बराबर‑बराबर जिनालयों का विभाजन माना जाता है
---
3. “54 तीर्थंकर” वाली बात पर विशेष रूप से
- शास्त्रों में कहीं भी “नंदीश्वर द्वीप के 54 तीर्थंकर”
- इसलिए किस‑तीर्थंकर की मूर्ति किस दिशा में, कौन‑से क्रम से 54 के रूप में
- अलग‑अलग स्थानों पर जो नंदीश्वर द्वीप के मॉडल / जिनालय बने हैं,
---
निष्कर्ष
- नंदीश्वर द्वीप में शास्त्रीय रूप से 52 शाश्वत जिनालय स्वीकार किए जाते हैं।
- ये चारों दिशाओं में समान रूप से (१३‑१३) विभक्त माने जाते हैं,
- ठीक‑ठीक “54 तीर्थंकरों की दिशा और पोज़ीशन” ऐसा कोई