Dev,guru,dharm ki wafadari ke liye varti kon bane
जैन धर्म के अनुसार, "व्रती" वह व्यक्ति कहलाता है जो देव (अरिहंत, सिद्ध), गुरु (आचार्य, उपाध्याय, साधु), और धर्म (जैन धर्म के सिद्धांतों) के प्रति निष्ठावान रहता है और व्रतों का पालन करता है। व्रती बनने के लिए व्यक्ति को जैन धर्म के पाँच मुख्य व्रत (अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) या अणुव्रतों (गृहस्थों के लिए) का पालन करना होता है।
देव, गुरु, और धर्म के प्रति सच्ची वफादारी (श्रद्धा और निष्ठा) दिखाने के लिए जैन अनुयायी व्रती बनते हैं—चाहे वे गृहस्थ हों या साधु। साधुओं के लिए महाव्रत और गृहस्थों के लिए अणुव्रत निर्धारित हैं।
इस प्रकार, जो भी व्यक्ति जैन धर्म के सिद्धांतों, देव, और गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखकर व्रतों का पालन करता है, वही "व्रती" कहलाता है।