When can we take navkarsi pachkan
Navkārsī पच्छखाण (प्रत्याख्यान) का अर्थ है – आज का पहला आहार (खाना/पीना) कम से कम सूर्योदय के बाद 48 मिनट बीतने के बाद ही लूँगा।
साधारण रूप से नियम ऐसे हैं:
- कब ले सकते हैं?
- जब आप नियमपूर्वक यह संकल्प लेना चाहें कि “मैं आज सूर्योदय के 48 मिनट के बाद ही पहला आहार करूँगा।” - यह पच्छखाण आमतौर पर सुबह उठने के बाद, शौच आदि से निवृत्त होकर, स्वाध्याय या पूजा के समय लिया जाता है।
- समय की बुनियाद
- सूर्योदय का सही समय देख लें (पंचांग, कैलेंडर, ऐप आदि से)। - उस समय से 48 मिनट बाद जो समय होता है, उसके बाद ही आप पहला ग्रास या पहला घूँट पानी ले सकते हैं। - इससे पहले कुछ भी खाना या पीना (यहाँ तक कि पानी भी) वर्जित हो जाता है यदि आपने नवकार्सी का पच्छखाण ले लिया है।
- किस स्थिति में न लें?
- यदि स्वास्थ्य ठीक न हो, कमजोरी हो, दवा खाली पेट लेनी हो आदि में, तो बिना मार्गदर्शन लिए कठोर पच्छखाण न लें। - यदि आप पहले से जानते हैं कि किसी कारणवश 48 मिनट बाद तक प्रतीक्षा नहीं कर पाएँगे, तो उस दिन यह पच्छखाण न ही लें, या गुरु/ज्ञानी से पूछकर हल्का नियम लें।
- प्रायोगिक क्रम (साधारण गृहस्थ के लिए)
सामान्य दिन में क्रम ऐसा हो सकता है: - प्रातः उठना - शौच, स्नान आदि - पूजा/स्वाध्याय के समय या उसके पहले– - अंतर्यामी भगवान/तीर्थंकर की भावना - फिर संकल्प: “आज मैं नवकार्सी करूँगा – मेरा पहला आहार सूर्योदय के 48 मिनट बाद ही होगा।” - सूर्योदय + 48 मिनट के बाद ही पहला आहार/पानी।
- महत्व
- यह संयम शरीर को नहीं, मन को अनुशासित करता है। - “जैसे ही उठूँ, तुरंत चाय/कॉफी/नाश्ता” – इस आदत पर संयम आता है। - यह अहिंसा और विरक्ति की दिशा में एक छोटा लेकिन बहुत उपयोगी कदम माना जाता है।
यदि आप चाहें तो मैं आपको नवकार्सी का पच्छखाण बोलने की सही परंपरागत वाणी (पाठ) भी लिखकर दे सकता हूँ।