त्रसकाय मीनिंग tell
“त्रसकाय” (त्रस + काय) एक महत्वपूर्ण जैन शब्द है।
इसे सरल भाषा में समझें:
- “काय” = शरीर (जीव का शरीर)
- “त्रस” = जो डर, पीड़ा या कष्ट को अनुभव कर सकता है, हिल-डुल सकता है
इसलिए,
त्रसकाय का अर्थ
वह जीव-शरीर (काय)- जिसमें इन्द्रियाँ हों,
- जो चल-फिर सकता हो,
- जो भय, पीड़ा, सुख-दुःख का अनुभव कर सकता हो,
जैन दृष्टि से:
- एकेन्द्रिय स्थावर जीव (जैसे पथ्थर, मिट्टी, पौधे आदि) – त्रसकाय नहीं कहलाते
- दो, तीन, चार, पाँच इन्द्रिय वाले चलायमान जीव – त्रसकाय माने जाते
संक्षेप में: जो जीव हिल-डुल सकते हैं, डर सकते हैं, और जिनमें संवेदनशीलता अधिक है – उनके शरीर को त्रसकाय कहा जाता है।