Shaayari on tapasya
नीचे कुछ सरल शायरी/पंक्तियाँ हैं जो जैन दृष्टि से तपस्या की भावना को व्यक्त करती हैं:
- तप की अग्नि में जब खुद को जलाया जाता है,
कर्मों का अंधेरा धीरे‑धीरे मिटाया जाता है।
- भूख प्यास सहकर भी जो शांति में मुस्कुराए,
ऐसी तपस्या से ही आत्मा प्रभु के पास जाए।
- तप है शरीर को कष्ट देना नहीं, ये बात जान,
तप है भीतर के राग‑द्वेष को करना आसान।
- मौन साधक के चेहरे की वो उजली सी छाप,
सालों की तपस्या का होता है वो आपाप।
- इच्छाओं को त्यागकर जो सरल जीवन अपनाए,
ऐसा तपस्वी इस लोक में ही स्वर्ग सुख पाए।
- जब ‘मैं‑मेरा’ छोड़ के आत्मा से नाता जुड़ जाए,
सम्यक दर्शन, ज्ञान, चरित्र – तप में खिलते जाएँ।
अगर चाहो तो मैं विशेष विषय पर भी शायरी बना सकता हूँ – जैसे: संलेखना, उपवास, पर्युषण की तपस्या आदि।