Parasnath naam jaap daily
दैनिक पारसनाथ नाम जप – सरल तरीका
- कौन‑सा नाम जपें? (कोई एक चुनकर रोज़ वही रखिए)
- “ॐ ह्रीं श्री पार्श्वनाथाय नमः” - या सरल रूप में: “श्री पारसनाथ प्रभु नमः”
- कब करें?
- सबसे अच्छा समय – सुबह स्नान के बाद, या रात को सोने से पहले। - अगर ज़्यादा समय न हो तो कम से कम 5–10 मिनट नियमित कीजिए।
- कैसे करें?
- शांत जगह पर बैठें, मोबाइल आदि दूर रखें। - पहले एक बार नमोकार मंत्र बोलें। - फिर आँखें हल्की बंद करके मन में या धीमे स्वर में नाम जपें। - चाहें तो माला से गिनें – शुरुआत में - 1 माला (108 बार) - या 11, 21, 51 बार – जितना आप रोज़ निभा सकें।
- कौन‑कौन से नियम रखें?
- जप के समय अहिंसा‑भाव रखें – किसी को भी दुःख न पहुँचाने का संकल्प। - क्रोध, ईर्ष्या, लोभ से बचने का निश्चय करें। - शाकाहार और जितना हो सके सात्त्विक व सरल भोजन रखें।
- आंतरिक भाव (मुख्य बात)
- “हे पारसनाथ प्रभु, - मेरे पाप कर्म नष्ट हों, - मुझमें क्षमा, दया और संयम बढ़े, - मैं सही मार्ग पर चलूँ।” - सिर्फ़ नाम नहीं, शरण और कृतज्ञता का भाव भी रखें।
- नियमितता कैसे बनाएं?
- रोज़ एक ही समय तय कर लें, जैसे – - सुबह उठते ही 5 मिनट, - या रात में सोने से पहले 5 मिनट। - शुरुआत कम संख्या से करें, आदत बन जाए तो धीरे‑धीरे बढ़ाएँ।
दैनिक नाम जप से मन शान्त होता है, डर कम होता है और धर्म में स्थिरता आती है। मुख्य चीज़ संख्या नहीं, नियमितता और सच्चा भाव है।