भागवती सूत्र મેં वर्णित निर्गथ का प्रकार क्या है
भागवती सूत्र की जैन परंपरा में निर्ग्रन्थ का आशय उस साधक से है जो ग्रन्थि, आसक्ति और परिग्रह से रहित हो।
सामान्यतः निर्ग्रन्थ के दो प्रकार बताए जाते हैं:
- द्रव्य निर्ग्रन्थ — जो बाह्य परिग्रह छोड़ चुका हो, जैसे वस्त्र, धन, संपत्ति आदि का त्याग।
- भाव निर्ग्रन्थ — जो भीतर से भी राग, द्वेष, कषाय और आसक्ति से मुक्त हो।
सच्चा निर्ग्रन्थ वही माना जाता है जिसमें बाह्य त्याग के साथ आंतरिक वीतरागता भी हो।