Amood dristi ke baare main bataye
अमूढ़-दृष्टि (Amūḍha-dṛṣ्टि) जैन धर्म में सम्यक्-दर्शन के आठ अंगों में से एक है। इसका अर्थ है — मिथ्या मतों, भ्रम, और बाहरी चमत्कारों से मोहित न होना, तथा सच्चे धर्म-पथ पर स्थिर रहना। इसे “अविचल / अडिग दृष्टि” भी समझा जा सकता है। ( wisdomlib.org)
सरल शब्दों में:
- जो सत्य धर्म है, उसी को मानना
- झूठे या भ्रामक मतों से प्रभावित न होना
- धर्म के नाम पर दिखावे, चमत्कार या भ्रम में न पड़ना
- सम्यक्-विश्वास को दृढ़ रखना ( wisdomlib.org)
यह सम्यक्-दर्शन को मजबूत करने वाला गुण है। जैन परंपरा में इसे एक बहुत महत्वपूर्ण आंतरिक अनुशासन माना गया है। ( jainknowledge.com)
अगर आप चाहें, मैं इसके आठ अंगों की पूरी सूची भी सरल हिंदी में बता सकता हूँ।