ॐ रिम श्रीं अरिहंत ऊवजाय श्री गौतम स्वामिने नमः
यह एक जैन नमस्कार-मंत्र/स्तुति रूप है, जिसमें अरिहंत, उपाध्याय, और श्री गौतम स्वामी को नमस्कार किया गया है।
पाठ का शुद्ध रूप इस प्रकार समझा जा सकता है: ॐ रीं श्रीं अरिहंत उवज्झाय श्री गौतम स्वामिने नमः
अर्थ:
- ॐ — पवित्र नाद
- रीं, श्रीं — मंगलसूचक बीजाक्षर
- अरिहंत — जिन आत्माओं ने कर्मों का नाश कर के केवलज्ञान प्राप्त किया
- उवज्झाय / उपाध्याय — जैन धर्म के उपदेशक साधु
- श्री गौतम स्वामी — भगवान महावीर के प्रमुख गणधर
भावार्थ: “मैं अरिहंत, उपाध्याय, और श्री गौतम स्वामी को विनम्र नमस्कार करता हूँ।”
यदि चाहें, मैं इसका सरल हिंदी अर्थ या जैन परंपरा के अनुसार शुद्ध पाठ भी दे सकता हूँ।