Jal pooja arth
जल पूजन का अर्थ:
जैन धर्म में जल पूजन का अर्थ है शुद्ध जल द्वारा भगवान की प्रतिमा का पूजन करना। इसका मुख्य भाव है:
- अंतर और बाहर की शुद्धि का स्मरण करना
- अहंकार, मलिनता और आसक्ति को धो देना
- भगवान की निर्मलता, शांति और पवित्रता को याद करना
- अपने मन को भी निर्मल और शांत बनाने का संकल्प लेना
जल में अपने-आप शीतलता, निर्मलता और पवित्रता का भाव होता है। इसलिए जल पूजन करते समय साधक यह भावना करता है कि जैसे जल से बाहरी अशुद्धि दूर होती है, वैसे ही मेरे भीतर के कषाय, राग-द्वेष और पाप-भाव भी दूर हों।
संक्षेप में: जल पूजन = निर्मलता, शांति, पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक।
अगर चाहें, मैं इसका संस्कृत/प्राकृत भावार्थ या पूजन में बोला जाने वाला अर्थ भी दे सकता हूँ।