Pakshal pooja vidhi arth
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पक्षाल पूजा का अर्थ है भगवान श्री जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा का शुद्ध जल से अभिषेक / प्रक्षालन करना। यह पूजा शुद्धि, विनय, और पवित्रता का प्रतीक है।
विधि
- स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं।
- मंदिर में शांत मन से प्रवेश किया जाता है।
- जिनप्रतिमा के सामने श्रद्धा से जल लेकर प्रक्षालन किया जाता है।
- इसके बाद प्रतिमा को स्वच्छ वस्त्र से पोंछकर आगे की पूजा की जाती है।
- मन में अहिंसा, भक्ति, और निर्मलता का भाव रखा जाता है।
अर्थ
- पक्षाल / प्रक्षालन = धोना, शुद्ध करना
- इसका बाह्य अर्थ है प्रतिमा की शुद्धि।
- इसका आंतरिक अर्थ है अपने मन, वचन, और कर्मों की मलिनता को धोने का भाव।
जैन दर्शन में यह पूजा हमें यह स्मरण कराती है कि जैसे हम प्रतिमा को पवित्र जल से शुद्ध करते हैं, वैसे ही हमें अपने राग, द्वेष, और कषायों को भी दूर करना चाहिए।
यदि आप चाहें, मैं पक्षाल पूजा की संपूर्ण विधि क्रमबद्ध रूप में भी लिख सकता हूँ।