Aagrahit mithhatva kya hai
आग्रहित मिथ्यात्व का अर्थ है पूर्वाग्रह से जकड़ा हुआ मिथ्या मत।
सरल शब्दों में:
- जब कोई व्यक्ति सत्य सुनकर भी उसे स्वीकार नहीं करता,
- अपने पुराने गलत विश्वास या जिद पर अड़ा रहता है,
- और विवेक से विचार करने के बजाय आग्रह, पक्षपात या हठ से गलत धारणा पकड़े रहता है,
तो उसे आग्रहित मिथ्यात्व कहा जाता है।
जैन दृष्टि से
मिथ्यात्व का अर्थ है सम्यक् दर्शन का अभाव। जब यह मिथ्यात्व आग्रह के साथ जुड़ जाता है, तब व्यक्ति:- अपने मत को ही एकमात्र सही मानता है,
- दूसरे दृष्टिकोण को नहीं सुनता,
- और सत्य के निकट आने में रुकावट पैदा करता है।
संक्षेप में
आग्रहित मिथ्यात्व = हठ, पक्षपात और पूर्वाग्रह से युक्त गलत मान्यता।अगर चाहें, मैं मिथ्यात्व के प्रकार भी सरल भाषा में समझा सकता हूँ।