माता चक्रेश्वरी की स्तुति, स्वरूप, या पूजा-विधि
माता चक्रेश्वरी जैन परंपरा में भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की शासनदेवी / यक्षिणी मानी जाती हैं। उनकी आराधना भक्ति, श्रद्धा और शुभ भाव से की जाती है।
1) स्वरूप
माता चक्रेश्वरी का स्वरूप परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न मिलता है, पर सामान्यतः उनका ध्यान इस प्रकार किया जाता है:- अष्टभुजी रूप
- हाथों में चक्र, शंख, धनुष-बाण आदि आयुध
- सुवर्णाभ या तेजोमय दिव्य रूप
- सिंह या अन्य वाहन पर आरूढ़
- भक्तों की रक्षा, विघ्न-निवारण और धर्म-सहायता करने वाली देवी
जैन दृष्टि में वे सिद्धि प्रदान करने वाली नहीं, बल्कि धर्म-आराधना में सहायक शासनदेवी हैं। मुख्य आराध्य तो तीर्थंकर भगवान ही हैं।
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2) स्तुति
यह एक सरल, भावपूर्ण स्तुति है:जय जय माता चक्रेश्वरी, आदिनाथ की शासना धारी। करुणा, रक्षा, मंगल दायिनी, भक्तों की तुम हो हितकारी।।
विघ्न हरो, शुभ बुद्धि दो, धर्म-मार्ग पर चलना सिखाओ। अहिंसा, संयम, सम्यक् भाव, हम सबके हृदय में बस जाओ।।
यदि आप चाहें तो मैं संस्कृत/प्राकृत शैली में भी छोटी स्तुति दे सकता हूँ।
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3) पूजा-विधि
चक्रेश्वरी माता की पूजा सामान्यतः इस प्रकार की जाती है:सरल विधि
- शुद्ध स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- मंदिर या घर में शांत स्थान पर आसन लगाएँ
- भगवान आदिनाथ के समक्ष पहले नमस्कार करें
- फिर चक्रेश्वरी माता का ध्यान करें
- अष्टगंध, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें
- नवकार मंत्र या शासनदेवी स्तुति का जप करें
- अंत में प्रार्थना करें कि वे धर्म, संयम और शुद्ध भावों में सहायक बनें
पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें
- पूजा का उद्देश्य भक्ति और शुद्ध भाव होना चाहिए
- आडंबर से अधिक अंतःकरण की निर्मलता महत्वपूर्ण है
- तीर्थंकर-भक्ति को सर्वोपरि रखें
- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम का पालन करें
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4) संक्षिप्त प्रार्थना
हे माता चक्रेश्वरी, हमारी बुद्धि को निर्मल करो। धर्म, दया, संयम और श्रद्धा में हमारी रक्षा करो। भगवान आदिनाथ के मार्ग पर हम दृढ़ रह सकें, ऐसी कृपा करो।अगर आप चाहें, तो मैं चक्रेश्वरी माता की विस्तृत आरती, पूजन-विधि, या संस्कृत स्तोत्र भी दे सकता हूँ।