Saiyami bhojan kyo karta hai starting with s
सैयामी भोजन (Sayyami Bhojan) जैन धर्म में संयम रखने वाले साधु-साध्वियों या श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किया जाने वाला भोजन है। "सैयामी" का अर्थ है संयम का पालन करने वाला। जैन धर्म में संयम (Sanyam) का बहुत महत्व है। संयम का पालन करने वाले व्यक्ति सिर्फ अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का पालन ही नहीं करते, बल्कि भोजन में भी बहुत संयम बरतते हैं।
सैयामी भोजन के कारण निम्नलिखित हैं:
1. संयम (Sanyam): जैन धर्म में संयम का पालन आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर आवश्यक है। भोजन में संयम रखने का अर्थ है — सीमित, साधारण, और सात्त्विक भोजन करना।
2. अहिंसा (Ahimsa): सैयामी भोजन में जीवों की हिंसा कम से कम हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए रात्रि भोजन, जमीन के नीचे उगने वाली चीजें, और अधिक जलजीवों की हिंसा वाले पदार्थ नहीं लिये जाते।
3. स्वास्थ्य (Health): संयमी भोजन से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। यह पाचन को ठीक रखता है और मन में शांति लाता है।
4. साधना (Sadhna): साधु-साध्वियाँ और संयमी श्रावक साधना के लिए हल्का, सीमित और निर्धारित समय में भोजन करते हैं, जिससे साधना में बाधा न आये।
5. मोह-लोभ से बचाव (Freedom from Attachment): सैयामी भोजन स्वाद, लालच, और आसक्ति से बचने में मदद करता है। इससे आत्मा की शुद्धि होती है।
6. नियम और अनुशासन (Discipline): संयमी व्यक्ति भोजन के नियत समय, मात्रा और प्रकार का पालन करता है। इससे जीवन में अनुशासन आता है।
संक्षेप में, जैन धर्म में सैयामी भोजन संयम, अहिंसा, साधना, स्वास्थ्य, और आत्मशुद्धि के लिए किया जाता है।