वैर का विश्राम स्थल क्या है
जैन धर्म के अनुसार, वैर (शत्रुता या द्वेष) का विश्राम स्थल "क्षमा" (forgiveness) है। अर्थात जब व्यक्ति क्षमा को अपनाता है, तो वैर का अंत हो जाता है। जैनागमों में कहा गया है—
"क्षमा वैरस्य विश्रामः"
अर्थात् क्षमा ही वैर का विश्राम स्थल है। क्षमा धारण करने से शत्रुता और द्वेष समाप्त हो जाते हैं। यही कारण है कि जैन धर्म में क्षमा को बहुत उच्च स्थान दिया गया है, विशेषकर "क्षमावाणी" और "क्षमापना" (क्षमा याचना) पर्वों में।
इसलिए, वैर का विश्राम स्थल "क्षमा" है।