किस संयमी मुनि के शरीर को बाघिन ने खाया
जैन धर्म के अनुसार, संयमी मुनि श्री कल्पसूत्र में वर्णित मुनि कलिकल (या कलिकाचर्य) के शरीर को बाघिन (शेरनी) ने खाया था। यह घटना जैन मुनियों की अत्यंत वैराग्यपूर्ण और त्यागमयी जीवनशैली को दर्शाती है। मुनि ने अपनी साधना और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए शरीर का कोई मोह नहीं रखा, और उनका शरीर जंगल में पड़ा रहा जिसे बाघिन ने खाया। यह प्रसंग जैन धर्म में शरीर के प्रति अनासक्ति और आत्मा की शुद्धि के महत्व को दर्शाता है।