क्या श्वेतांबर भी समयसार को मानते है?
सामान्यतः श्वेतांबर परंपरा समयसार को आगमिक/प्रामाणिक ग्रंथ के रूप में नहीं मानती। समयसार दिगंबर आचार्य कुंदकुंद का अत्यंत महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ है, और यह दिगंबर परंपरा में विशेष आदर से पढ़ा जाता है।
श्वेतांबर परंपरा में मुख्य प्रामाणिकता आगम ग्रंथों पर अधिक आधारित है, इसलिए समयसार को वे सामान्यतः शास्त्रीय अधिकार के रूप में स्वीकार नहीं करते। फिर भी, कुछ श्वेतांबर साधक या विद्वान इसे जैन दर्शन के गहरे आध्यात्मिक ग्रंथ के रूप में अध्ययन कर सकते हैं।
संक्षेप में:
- दिगंबर: समयसार बहुत मान्य और प्रमुख
- श्वेतांबर: सामान्यतः आगम-प्रमाण के रूप में नहीं, लेकिन दार्शनिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है
अगर चाहें, मैं श्वेतांबर और दिगंबर में समयसार को लेकर अंतर सरल तालिका में बता सकता हूँ।