जैनों की मूल शाखा कौन सी है?
जैन धर्म की मूल परंपरा एक ही है — श्रमण/निर्ग्रन्थ परंपरा।
बाद में जैन समाज में मुख्यतः दो प्रमुख शाखाएँ विकसित हुईं:
- दिगंबर
- श्वेतांबर
इसलिए यदि “मूल शाखा” से आशय सबसे प्राचीन मूल परंपरा हो, तो वह निर्ग्रन्थ जैन परंपरा है। और यदि “मुख्य शाखाएँ” पूछी जा रही हों, तो वे दिगंबर और श्वेतांबर हैं।