jain dharam ki sthapana kisne ki aur kab
जैन धर्म किसी एक व्यक्ति ने “स्थापित” नहीं किया; जैन दर्शन के अनुसार यह अनादि-अनंत है, यानी इसका कोई आरंभ नहीं है।
यदि वर्तमान अवसर्पिणी काल की बात करें, तो जैन परंपरा में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) को जैन धर्म के प्रथम प्रवर्तक के रूप में माना जाता है।
समय के विषय में जैन ग्रंथों में इसे बहुत प्राचीन, कल्पों और युगों की गणना से बताया गया है; इसलिए इसे सामान्य इतिहास की तारीखों में नहीं बाँधा जाता।
संक्षेप में:
- स्थापक: कोई एक नहीं
- प्रथम तीर्थंकर: भगवान ऋषभदेव / आदिनाथ
- धर्म का स्वरूप: अनादि-अनंत