Satsoo munirajo k upsarg ka nimitt kon Bane?
"Satsoo munirajo ke upsarg ka nimitt kon bane?" — इसका उत्तर जैन धर्म के अनुसार इस प्रकार है:
सत्सू मुनिराजों के उपसर्ग (कष्ट या विघ्न) का निमित्त (कारण) प्रायः उनके पूर्व जन्म के कर्म होते हैं। जैनागमों के अनुसार, जब कोई मुनिराज सच्चे भाव से संयम और तप का पालन करता है, तब उसके संचित (आयुष, वेदनीय, नाम आदि) और उदय में आए हुए कर्मों के फलस्वरूप उसकी परीक्षा होती है। इन उपसर्गों का बाह्य निमित्त अनेक बार मनुष्य, पशु, दैत्य, या देव भी बन सकते हैं, परंतु असली कारण तो मुनिराज के कर्म ही होते हैं।
जैसे—भगवान महावीर को गोशालक, चंडकौशिक सर्प, संघमित्र आदि ने उपसर्ग दिए, परंतु वे सब उनके कर्मों के उदय के निमित्त मात्र थे।
सारांश: मुनिराज के उपसर्गों का मुख्य कारण उनके अपने पूर्व जन्मों के पापकर्म होते हैं, और बाहरी निमित्त (व्यक्ति, पशु, या अन्य) केवल माध्यम होते हैं।