संसार क्या है?
संसार जैन धर्म में उस जन्म–मरण के अनादि चक्र को कहा जाता है, जिसमें जीव अपने कर्मों के कारण बार-बार अलग-अलग गतियों में जन्म लेता है।
सरल अर्थ:
संसार =- जन्म
- मरण
- फिर जन्म
- फिर मरण
यह चक्र तब तक चलता रहता है जब तक जीव अपने कर्मों का क्षय करके मोक्ष प्राप्त न कर ले।
जैन दृष्टि से:
संसार में जीव:- शरीर बदलता रहता है
- दुख-सुख भोगता है
- कर्मों के बंधन में रहता है
- अज्ञान, राग, द्वेष और मोह से बंधा रहता है