भगवान के 1008 लक्षण कौन से हैं?
जैन परंपरा में भगवान के लिए 1008 का प्रयोग मुख्यतः सम्मानसूचक संख्या के रूप में होता है। यह किसी एक सार्वभौमिक, सभी परंपराओं में एक समान निश्चित “1008 लक्षणों” की सूची नहीं है। अक्सर इसका आशय तीर्थंकर भगवान, अरिहंत, सिद्ध, परमात्मा के गुणों, नामों, और विशेषणों से लिया जाता है।
भगवान के प्रमुख लक्षण / गुण
जैन दृष्टि से भगवान के मुख्य गुण ये हैं:- अनंत ज्ञान
- अनंत दर्शन
- अनंत सुख
- अनंत वीर्य
- राग-द्वेष का पूर्ण अभाव
- कषायों का नाश
- मोक्षमार्ग का पूर्ण ज्ञान
- सर्व जीवों के प्रति समभाव
- अहिंसा की पूर्ण सिद्धि
- परिग्रह रहितता
- वीतरागता
- कर्ममल से पूर्ण मुक्ति
1008 का अर्थ
जैन भक्ति-परंपरा में 1008 का अर्थ होता है:- अत्यधिक पवित्रता
- असंख्य सद्गुणों का संकेत
- भगवान के अनंत और अप्रमेय गुणों का आदर
सरल रूप में
यदि आप “भगवान के 1008 लक्षण” पूछ रहे हैं, तो उसका भाव यह है कि:भगवान पूर्ण वीतराग, सर्वज्ञ, सर्वदर्शी, अनंतगुणसंपन्न, और कर्मबंधन से मुक्त परमात्मा हैं।
अगर आप चाहें, तो मैं भगवान के 108 प्रमुख गुण या तीर्थंकर के गुण भी सरल सूची में बता सकता हूँ।