अरिहंत के 1008 लक्षण कौनसे होते है?
जैन परंपरा में अरिहंत के “1008 लक्षण” की कोई एक ही सर्वमान्य, निश्चित सूची नहीं मानी जाती।
आमतौर पर 1008 संख्या का प्रयोग अरिहंत/तीर्थंकर के असंख्य गुणों, नामों और मंगल स्वरूप विशेषताओं को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह संख्या प्रतीकात्मक है, जिसका अर्थ है कि भगवान अरिहंत के गुण गिनती से परे हैं।
संक्षेप में अरिहंत के प्रमुख गुण
अरिहंत के मुख्य रूप से ये गुण बताए जाते हैं:- केवलज्ञान
- वीतरागता
- सर्वज्ञता
- अहिंसा
- सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र
- 18 दोषों का अभाव
- 34 अतिशय
- 8 प्रतिहार्य
महत्वपूर्ण बात
यदि कहीं 1008 नाम या 1008 गुणों का पाठ मिलता है, तो वह सामान्यतः स्तुति/स्तोत्र परंपरा से जुड़ा होता है, न कि एक ही शास्त्रीय सूची से।अगर चाहें, मैं अरिहंत के 34 अतिशय या 8 प्रतिहार्य सरल हिंदी में लिख सकता हूँ।