चौंविहार क्या होता है
चौंविहार जैन धर्म में एक आचार-नियम है, जिसमें सूर्यास्त के बाद कुछ भी खाना-पीना नहीं किया जाता। अर्थात्:
- रात में भोजन नहीं
- रात में पानी भी नहीं
- सामान्यतः सूर्योदय से पहले भी भोजन नहीं किया जाता
इसका उद्देश्य अहिंसा और संयम का पालन करना है, क्योंकि रात्रि में सूक्ष्म जीवों की अधिक संभावना मानी जाती है।
जैन परंपरा में इसे बहुत पवित्र अनुशासन माना जाता है। कुछ स्थानों पर इसके साथ अष्टप्रहर/उपवास-नियमों की चर्चा भी होती है, लेकिन साधारण अर्थ में चौविहार = रात का पूर्ण त्याग समझा जाता है।
अगर चाहें, मैं चौविहार और तिविहार का अंतर भी सरल भाषा में बता सकता हूँ।