चौंविहार और तिविहार क्यों करना होता है
चौंविहार और तिविहार संयम, अहिंसा और अप्रमाद के लिए किए जाते हैं।
1) चौंविहार क्यों?
चौंविहार में रात्रि के चारों आहार छोड़े जाते हैं:- खाना
- पीना
- चबाना
- चूसना
इसका मुख्य कारण है:
- रात में सूक्ष्म जीवों की अधिक हिंसा से बचना
- इन्द्रियों पर संयम रखना
- धर्म-आराधना में जागरूक रहना
- अहिंसा की भावना को मजबूत करना
2) तिविहार क्यों?
तिविहार में रात्रि का ठोस आहार छोड़ दिया जाता है, लेकिन कुछ परंपराओं में उपयुक्त पानी लिया जा सकता है।इसका कारण:
- हिंसा कम करना
- व्रत-नियम को कुछ सरल रूप में पालन करना
- धीरे-धीरे संयम की ओर बढ़ना
3) इसका आध्यात्मिक अर्थ
जैन धर्म में भोजन केवल शरीर-निर्वाह के लिए है, लेकिन संयम और अहिंसा उससे भी ऊपर हैं। इसलिए रात्रि में आहार-त्याग करने से:- जीव-दया बढ़ती है
- व्रत-पालन मजबूत होता है
- आत्म-शुद्धि होती है
- कर्म-बंधन कम करने की भावना बढ़ती है
4) संक्षेप में
- चौंविहार = रात में चारों प्रकार का आहार त्याग
- तिविहार = रात में केवल ठोस आहार का त्याग
दोनों का मूल उद्देश्य है: अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि।