प्रासुक का अर्थ
प्रासुक का अर्थ है निर्दोष, शुद्ध, और उपयोग के योग्य ऐसा पदार्थ जो जीव-हिंसा से यथासंभव रहित हो।
जैन धर्म में प्रासुक वस्तु वह मानी जाती है जो:
- जीवों से युक्त न हो,
- उपयोग से पहले शुद्ध की गई हो,
- और हिंसा को कम से कम करे।
विशेषतः भोजन, जल, स्थान, या अन्य सामग्री के संदर्भ में प्रासुक शब्द का प्रयोग होता है। इसका भाव है अहिंसक, स्वच्छ, और धर्मसम्मत वस्तु।
सरल शब्दों में: प्रासुक = शुद्ध + अहिंसक + उपयोग योग्य।