जीव का जगत अपने ज्ञान के हिसाब से छोटा बड़ा होता हैं?
हाँ, जैन दृष्टि से ऐसा कहा जा सकता है कि जीव का अनुभव-जगत उसके ज्ञान के अनुसार छोटा या बड़ा प्रतीत होता है।
- वास्तविक लोक का स्वरूप अपने स्थान पर निश्चित है।
- लेकिन जीव जितना जानता है, उतना ही उसका जगत उसके लिए खुलता है।
- अल्पज्ञान वाले जीव का जगत संकुचित होता है।
- अधिक ज्ञान वाले जीव का जगत विस्तृत होता है।
- केवलज्ञानी के लिए समस्त लोक-ालोक का यथार्थ ज्ञान प्रकट होता है।
इसलिए कहा जा सकता है कि जगत का अनुभव ज्ञान पर निर्भर करता है। ज्ञान बढ़ने से जीव की दृष्टि भी व्यापक होती है।