स्थानकवासी जैन क्या होता है
स्थानकवासी जैन जैन धर्म की श्वेताम्बर परंपरा का एक संप्रदाय है।
इसके मुख्य बिंदु:
- ये मूर्ति-पूजा नहीं करते।
- ये स्थानक या उपाश्रय में बैठकर धर्म-श्रवण, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप, स्वाध्याय आदि करते हैं।
- इनका जोर आत्मशुद्धि, संयम, अहिंसा, और साधना पर होता है।
- “स्थानकवासी” का अर्थ है — जो स्थानक में रहने/साधना करने वाले हैं।
सरल शब्दों में: जो जैन साधु-साध्वी और श्रावक-श्राविकाएं मूर्ति-मंदिर की बजाय स्थानक में धर्म-साधना करते हैं, वे स्थानकवासी कहलाते हैं।
यह संप्रदाय श्वेताम्बर जैन परंपरा के भीतर आता है।