मूर्तिपूजक जैन क्या होते है
मूर्तिपूजक जैन वे जैन होते हैं जो भगवान तीर्थंकरों की मूर्तियों के माध्यम से भक्ति, पूजन, अभिषेक, अर्चना और दर्शन करते हैं।
सरल अर्थ
- मूर्ति = तीर्थंकर भगवान की प्रतिमा
- पूजक = पूजन करने वाला
- इसलिए मूर्तिपूजक जैन का अर्थ हुआ: जो मूर्ति के माध्यम से भगवान का स्मरण और पूजन करता है
जैन धर्म में इसका भाव
मूर्ति को भगवान नहीं माना जाता, बल्कि उसे:- स्मरण का माध्यम
- ध्यान का आलंबन
- वैराग्य और श्रद्धा का प्रेरक
मुख्य उद्देश्य
मूर्तिपूजा का उद्देश्य:- तीर्थंकरों के गुणों का स्मरण
- मन की शुद्धि
- श्रद्धा बढ़ाना
- अहिंसा, संयम और वैराग्य की भावना जगाना
परंपरा के अनुसार
जैन धर्म में मुख्य रूप से दो बड़ी परंपराओं में मूर्तिपूजा की परंपरा मिलती है:- श्वेतांबर
- दिगंबर
इनमें पूजन-विधि और कुछ नियमों में अंतर हो सकता है, लेकिन तीर्थंकर-भक्ति का भाव समान रहता है।