तेरापंथ क्या होता हैं
तेरापंथ जैन धर्म की एक प्रमुख श्वेतांबर परंपरा है। इसे श्रमण परंपरा भी कहा जाता है, और इसका विशेष बल एकता, अनुशासन, संयम, और आचार-शुद्धि पर होता है।
सरल अर्थ
- “तेरा” = तेरह
- “पंथ” = मार्ग या परंपरा
यह नाम 13 धार्मिक नियमों/आचार-आधारों से जुड़ा माना जाता है। तेरापंथ की स्थापना आचार्य भिक्षु स्वामी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
तेरापंथ की मुख्य विशेषताएँ
- एक आचार्य, एक व्यवस्था, एक विचार
- सादगी और अनुशासन पर जोर
- अहिंसा, संयम, तप, और आत्मशुद्धि का पालन
- मुनि और आर्यिका/साध्वी परंपरा में कठोर आचार
तेरापंथ किस जैन परंपरा में आता है?
यह श्वेतांबर जैन धर्म की एक विशिष्ट शाखा है।यदि आप चाहें, मैं तेरापंथ का इतिहास, आचार्य भिक्षु, और इसके 13 नियम भी सरल भाषा में समझा सकता हूँ।