क्या सहज स्वभाव पाना ही सुख है
हाँ, जैन दृष्टि से सहज स्वभाव में स्थित होना ही वास्तविक सुख है।
सहज स्वभाव का अर्थ है:
- आत्मा के अपने शुद्ध स्वरूप में स्थित होना,
- राग-द्वेष, मोह, क्रोध, मान, माया, लोभ से हटना,
- और ज्ञान, दर्शन, शांति, आनंद में टिकना।
जैन दर्शन के अनुसार बाहरी भोग-विलास, सुविधा, प्रशंसा या वस्तुएँ क्षणिक सुख देती हैं, लेकिन वे स्थायी नहीं हैं। सच्चा सुख तो तब होता है जब आत्मा अपने स्वभाव में रहती है।
अर्थात:
- विकल्पों से दूर होना
- आत्मा में स्थिर होना
- कर्मों के बंधन से मुक्त होने की दिशा में बढ़ना
यही जैन साधना का मूल लक्ष्य है।
संक्षेप में: हाँ, सहज स्वभाव पाना ही आत्मिक सुख है।