क्या जीवो की संख्या नियत ही है
हाँ, जैन धर्म के अनुसार जीवों की संख्या न तो घटती है, न बढ़ती है — क्योंकि जीव अनादि-अनंत हैं।
सरल अर्थ:
- हर जीव शाश्वत है
- किसी नए जीव की उत्पत्ति नहीं होती
- किसी जीव का पूर्ण नाश नहीं होता
- जीव एक शरीर छोड़कर दूसरे शरीर में जाता रहता है
इसलिए कहा जाता है कि जीवों की संख्या कुल मिलाकर नियत/स्थिर है, परंतु वे निरंतर जन्म-मरण में भ्रमण करते रहते हैं।
जैन दृष्टि से:
- जीवों की संख्या अनंत मानी जाती है।
- वे संसार में अलग-अलग गतियों में हैं: