Jayant sen suri ji maharaj ko yug prabhawak padvi kaha mili
जयंति सेन सूरी जी महाराज को "युग प्रवर्तक" (या युग प्रभावक) की पदवी श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन सम्प्रदाय में उनके विशिष्ट योगदान, समाज सुधार, तथा जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए दी गई थी। जयंति सेन सूरी जी महाराज ने जैन समाज में कई सुधार किए, मूर्तिपूजा का प्रचार किया, तथा अनुशासन और चारित्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उनके नेतृत्व में जैन समाज ने एक नया उत्साह और दिशा प्राप्त की। इसलिए उन्हें "युग प्रभावक" (अर्थात् युग को प्रभावित करने वाले) की पदवी दी गई।
यदि आप विशेष रूप से जानना चाहते हैं कि यह पदवी उन्हें कब और किस प्रसंग पर दी गई, तो ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, विक्रम संवत १२१८ (ई. स. ११६१) में पाटन नगर (गुजरात) में आयोजित एक भव्य सभा में जयंति सेन सूरी जी महाराज को "युग प्रभावक आचार्य" की उपाधि से अलंकृत किया गया था। यह सभा जैन समाज के लिए ऐतिहासिक थी और यहीं से जयंति सेन सूरी जी के प्रभावी नेतृत्व की एक नई शुरुआत मानी जाती है।