आत्मरक्षास्तोत्रम् wordings / lyrics
हाँ, आत्मरक्षास्तोत्रम् का प्रचलित पाठ यह है। इसमें ॐ परमेष्टि नमस्कारं... से शुरू होने वाला श्लोकसमूह मिलता है; कुछ शब्दों में परंपरा/प्रकाशन के अनुसार हल्का पाठांतर हो सकता है। ( jainstavan.in)
आत्मरक्षास्तोत्रम्
ॐ परमेष्टि नमस्कारं, सारं नवपदात्मकम् | आत्मरक्षा करं वज्रं, पंजराभं स्मराम्यहम् ||
ॐ नमो अरिहंताणं, शिरस्कं शिरसि स्थितम् | ॐ नमो सव्व सिद्धाणं, मुखे मुखपटं वरम् ||
ॐ नमो आयरियाणं, अंगरक्षातिशायिनी | ॐ नमो उवज्झायाणं, आयुधं हस्तयोर्दृढम् ||
ॐ नमो लोए सव्व साहुणं, मोचके पादयो: शुभे | एसो पञ्च नमोक्कारो, शिलावज्रमयि तले ||
सव्व पावपणासणो, वप्रो वज्रमयो बहि: | मंगलाणंच सव्वेसिं, खादिरांगार खातिका ||
स्वाहान्तं च पदं ज्ञेयं, पढमं हवइ मंगलं | वप्रोपरि वज्रमयं, पिधानं देहि रक्षणे ||
महाप्रभावा रक्षेयं, क्षुद्रोपद्रव नाशिनी | परमेष्टी पदोद्भूता, कथिता पूर्व सूरिभि: ||
यश्चैवं कुरुते रक्षां, परमेष्टि पदै: सदा | तस्य न स्याद भयं व्याधि-राधिश्चापी कदाचन ||
अगर आप चाहें, तो मैं इसका सरल अर्थ (अर्थ/भावार्थ) भी दे सकता हूँ।