Meaning of the lyrics आणि मन शुद्ध आस्था ,देव जुहारु शाश्वता(२) पार्श्वनाथ मन वांचित पु चिंता मणि मारी चिंता चूर…. शंखेश्वर दादा मारी चिंता चूर…. अणियाली थारी आँखड़ी जाणे कामलतणी पांखडी मुख दीठा दुःख जावे दूर चिंतामणि मारी……… शंखेश्वर दादा मारी चिंता चूर
यह श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ / चिंतामणि स्तोत्र की भावपूर्ण पंक्तियाँ हैं। इसका सामान्य अर्थ इस प्रकार है:
सरल अर्थ
- “मन शुद्ध आस्था, देव जुहारु शाश्वता”
- “पार्श्वनाथ मन वांचित पु चिंता मणि मारी चिंता चूर”
- “शंखेश्वर दादा मारी चिंता चूर”
- “अणियाली थारी आँखड़ी जाणे कामलतणी पांखडी मुख दीठा दुःख जावे दूर”
- “को केहने को केहने नमे, मारा मन मा तुही गमे”
- “सदा जुहरु उगते सुर”
- “बिछड़िया बालेसर बेल, वैरी दुश्मन पाछा ठेल”
- “तू छे मारा हाज़रा हुज़ूर”
- “यह स्तोत्र जो मनमें धरे तेहनो काज सदाई सरे, आधी व्याधि सब जावे दूर”
- “मुझ मन लागि तुमसु प्रीत”
- “दुझो कोई न आवे चित्त”
- “कर मुझ तेज प्रताप प्रचुर”
- “भव भव देजो तुम पद सेव”
- “श्री चिंतामणि अरिहंत देव”
- “समय सुन्दर कहे गुण भरपूर”
भावार्थ
इस स्तोत्र में भक्त श्री पार्श्वनाथ दादा से यह प्रार्थना करता है कि:- मन की चिंता दूर हो,
- जीवन की बाधाएँ हटें,
- शत्रु और विघ्न समाप्त हों,
- मन में केवल प्रभु की भक्ति रहे,
- और जन्म-जन्मांतर तक प्रभु के चरणों की सेवा मिले।
यह स्तुति श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शांति का सुंदर भाव प्रकट करती है।