in hindi give me the definition of aasrava tatva and mention its types with example
आस्रव तत्त्व का अर्थ है — आत्मा में कर्मों के आने का मार्ग। जब जीव मिथ्यात्व, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग के कारण नए कर्मों को आकर्षित करता है, तब उसे आस्रव कहते हैं।
आस्रव के प्रकार
आस्रव मुख्यतः 5 कारणों से होता है:- मिथ्यात्व आस्रव
- गलत श्रद्धा या तत्त्वों का विपरीत ज्ञान। - उदाहरण: सम्यक दर्शन को न मानकर मोहवश गलत मान्यताएँ रखना।
- अविरति आस्रव
- व्रतों और संयम का अभाव, इन्द्रियों पर नियंत्रण न होना। - उदाहरण: बिना संयम के हिंसा, झूठ या अनावश्यक भोग-विलास में प्रवृत्त होना।
- प्रमाद आस्रव
- असावधानी, आलस्य, धर्म में लापरवाही। - उदाहरण: स्वाध्याय और ध्यान में ढिलाई करना, जागरूक न रहना।
- कषाय आस्रव
- क्रोध, मान, माया, लोभ। - उदाहरण: क्रोध में आकर किसी को अपशब्द कहना, लोभ में छल करना।
- योग आस्रव
- मन, वचन और काय की प्रवृत्ति। - उदाहरण: मन में बुरे विचार आना, झूठ बोलना, या हिंसक कार्य करना।
सरल परिभाषा
जिस कारण से आत्मा में कर्मों का प्रवेश होता है, उसे आस्रव तत्त्व कहते हैं।यदि चाहो, मैं आस्रव तत्त्व का शुद्ध संस्कृत सूत्र रूप भी हिंदी अर्थ सहित दे सकता हूँ।