45 Āgamas in simple Hindi names - the meaning of each Āgama
45 आगमों के सरल हिन्दी नाम और उनके अर्थ (यह सूची श्वेताम्बर परंपरा में प्रचलित 45 आगमों के अनुसार है।)
1) 11 अंग आगम
- आचारांग — आचार, संयम और साधु-जीवन का मूल ग्रंथ
- सूत्रकृतांग — सिद्धांतों और शास्त्रीय उपदेशों का संग्रह
- स्थानांग — विषयों का क्रमबद्ध वर्गीकरण
- समवायांग — समान संख्या और समूहों का वर्णन
- भगवती सूत्र — महावीर स्वामी के विस्तृत प्रश्नोत्तर
- ज्ञाताधर्मकथा — धर्मकथाओं और दृष्टान्तों का ग्रंथ
- उपासकदशा — श्रावकों के आचरण का वर्णन
- अन्तकृतदशा — मोक्ष पाने वाले साधकों का वर्णन
- अनुत्तरौपपातिकदशा — उत्तम लोकों में उत्पन्न होने वालों का वर्णन
- प्रश्नव्याकरण — प्रश्नों के उत्तर और व्याख्या
- विपाकसूत्र — कर्मों के फल का वर्णन
2) 12 उपांग आगम
- औपपातिक — देव, नारक आदि जन्मों का वर्णन
- राजप्रश्नीय — राजा-प्रश्न और दार्शनिक संवाद
- जीवाभिगम — जीवों के भेद और स्वरूप का वर्णन
- प्रज्ञापना — जीव, पदार्थ और तत्त्वों की विस्तृत व्याख्या
- सूर्यप्रज्ञप्ति — सूर्य के स्वरूप और गति का वर्णन
- जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति — जम्बूद्वीप का भौगोलिक वर्णन
- चन्द्रप्रज्ञप्ति — चन्द्रमा का वर्णन
- निरयावलिका — नरक गति का वर्णन
- कल्पावतंसिका — देव-लोक और कल्पों का वर्णन
- पुष्पिका — कथाओं और देववर्णन से संबंधित ग्रंथ
- पुष्पचूलिका — पुष्पिका का पूरक ग्रंथ
- वृष्णिदशा — वृष्णि वंश और संबंधित कथाएँ
3) 10 प्रकीर्णक आगम
- चतुःशरण — चार शरण: अरिहंत, सिद्ध, साधु, धर्म
- आतुरप्रत्याख्यान — रोग, मृत्यु और वैराग्य का उपदेश
- भक्तपरिज्ञा — भोजन-परित्याग और तप का वर्णन
- संस्तारक — संलेखना / समाधिमरण का वर्णन
- तन्दुलवैचारिक — शरीर, आहार और जीवन-चिंतन
- चन्द्रवेध्यक — ध्यान और वैराग्य संबंधी ग्रंथ
- देविन्द्रस्तव — देवों की स्तुति
- गणिविद्या — गणधर और आचार्य-परंपरा से संबंधित
- महाप्रत्याख्यान — बड़े संकल्प-त्याग का ग्रंथ
- वीरस्तव — भगवान महावीर की स्तुति
4) 6 छेदसूत्र
- निशीथ — रात्रि-कालीन आचार और नियम
- महानिशीथ — गूढ़ आचार और अनुशासन
- व्यवहार — संघ-व्यवस्था और शुद्धि नियम
- आचारदशा — साधु-आचरण के नियम
- कल्प — साधु-विधि और मर्यादा
- जीतकल्प — विशेष अनुशासन और तप नियम
5) 4 मूलसूत्र
- उत्तराध्ययन — अंतिम उपदेश और गहन धर्मचर्चा
- आवश्यक — प्रतिदिन की आवश्यक क्रियाएँ
- दशवैकालिक — दशकाल में पालन योग्य साधु-आचार
- पिंडनिर्युक्ति — आहार-ग्रहण की शुद्ध विधि
6) 2 चूलिका सूत्र
- नन्दीसूत्र — आगमों और ज्ञान का परिचय
- अनुयोगद्वार — शास्त्र के अध्ययन की विधि
सरल अर्थ में
- अंग आगम = मूल और प्रमुख शास्त्र
- उपांग = सहायक/विस्तार रूप ग्रंथ
- प्रकीर्णक = विविध विषयों के छोटे ग्रंथ
- छेदसूत्र = साधु-आचार के विशेष नियम
- मूलसूत्र = आधारभूत नियमग्रंथ
- चूलिका = अध्ययन की कुंजी और पद्धति
यदि आप चाहें, तो मैं इन्हें एकदम छोटी, याद करने योग्य तालिका में भी लिख सकता हूँ।