Is a papa bhiru jeev samyagdrishti
पापभीरु जीव होना अपने-आप में सम्यग्दृष्टि होना नहीं है।
सम्यग्दृष्टि वह जीव है जिसे जीव-अजीव, पुण्य-पाप, बंध-मोक्ष का यथार्थ बोध होता है और जिसे सम्यक् श्रद्धा होती है। पापभीरु जीव वह है जो पाप से डरता है और पाप करना नहीं चाहता।
इसलिए:
- पाप से डरना एक अच्छा लक्षण है।
- लेकिन केवल पापभीरु होना पर्याप्त नहीं है।
- सम्यग्दृष्टि होने के लिए सम्यक् श्रद्धा और तत्त्वों का सही ज्ञान भी आवश्यक है।
संक्षेप में:
- हर सम्यग्दृष्टि पापभीरु हो सकता है,
- लेकिन हर पापभीरु जीव सम्यग्दृष्टि नहीं होता।
यह स्थिति सम्यग्दर्शन की निकटता दिखा सकती है, पर पूर्ण सम्यग्दृष्टि के लिए तत्त्वज्ञान और श्रद्धा आवश्यक हैं।