JIV KE 8 ACHAL PRADESH KISKO KAHATE HAI
जैन दर्शन में जीव के 8 अचल प्रदेश से सामान्यतः शरीर के वे भाग समझे जाते हैं जो स्थिर, कठोर और कम-चलायमान होते हैं। इनका संबंध जीव की देह-रचना से बताया जाता है, न कि केवल एक साधारण शारीरिक गिनती से।
अचल प्रदेश के रूप में प्रायः ये भाग लिए जाते हैं:
- हाथ
- पैर
- सिर
- पीठ
- छाती
- पेट
- कंधे
- नितम्ब / कमर का भाग
अर्थात, शरीर के वे भाग जिन्हें अचल, स्थिर या कम गतिशील माना जाता है, उन्हें अचल प्रदेश कहा जाता है।
यदि आप चाहें, तो मैं इसका शुद्ध जैन शास्त्रीय अर्थ भी सरल भाषा में समझा सकता हूँ।