क्या श्रीधर स्वामी अंतिम केवली थे पंचम काल के
जैन परंपरा में श्रीधर केवली को कई स्थानों पर पंचम काल के अंतिम केवली के रूप में स्मरण किया जाता है, और कुंडलगिरि/कुंडलपुर को उनका मोक्ष-स्थल बताया जाता है। ( vitragelibrary.org)
लेकिन शास्त्रीय क्रम में एक भेद समझना ज़रूरी है:
- महावीर स्वामी के बाद जम्बूस्वामी को अंतिम अनुबद्ध केवली माना जाता है। ( vitragelibrary.org)
- भद्रबाहु स्वामी को अंतिम श्रुतकेवली माना जाता है। ( vitragelibrary.org)
इसलिए संक्षेप में: हाँ, कुछ जैन परंपराओं में श्रीधर स्वामी को पंचम काल के अंतिम केवली माना जाता है; पर “अंतिम केवली” की उपाधि का प्रयोग परंपरा और श्रेणी के अनुसार अलग-अलग अर्थों में मिलता है।