क्या जंबू स्वामी के बाद ७०० अननुबद्ध केवली हुए
नहीं, जंबू स्वामी के बाद ७०० अननुबद्ध केवली हुए — ऐसा मान्य Jain siddhant नहीं माना जाता। Jain tradition में जंबू स्वामी को इस अवसर्पिणी काल के अंतिम केवली के रूप में माना जाता है। उनके बाद श्रुतकेवली परंपरा चली, और Jain literature में बाद की गिनती सीमित बताई जाती है, ७०० नहीं। ( jainknowledge.com)
अगर “अननुबद्ध केवली” से आपका अर्थ श्रमण-परंपरा के कुछ विशेष ज्ञानी साधु है, तो वह अलग विषय है; लेकिन केवली के रूप में ७०० की संख्या Jain tradition में प्रचलित नहीं है। ( jainknowledge.com)