Gochri me kitne dosh hai
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जैन धर्म के अनुसार गोचरी (भिक्षा या आहार लेने की प्रक्रिया) में पाँच मुख्य दोष (पाँच गोचरी दोष) माने गए हैं। इन दोषों से बचना आवश्यक है, ताकि आहार शुद्ध और अहिंसक रहे। ये पाँच गोचरी दोष इस प्रकार हैं:
- राग (Attachment/Preference): विशेष प्रकार के भोजन की इच्छा रखना।
- द्वेष (Aversion): किसी भोजन को नापसंद करना या ठुकराना।
- संशय (Doubt): भोजन की शुद्धता या अहिंसा को लेकर संदेह करना।
- अभ्यवहार्यता (Impropriety): समय, स्थान या विधि के अनुसार अनुचित ढंग से आहार लेना।
- अविनय (Disrespect): आहार देने वाले या भोजन के प्रति विनय/आदर न रखना।
इन दोषों से बचकर ही गोचरी ग्रहण करना जैन साधु-साध्वियों और श्रावकों-श्राविकाओं के लिए श्रेयस्कर माना गया है।