pancham kul ka itihas
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यदि आपका अभिप्राय पंचम काल से है, तो जैन धर्म में कालचक्र के अवसर्पिणी भाग के छठे में से पाँचवें काल को पंचम काल कहा गया है। यह वर्तमान युग का वह चरण है जिसमें धर्म, आयु, बल और आध्यात्मिकता धीरे-धीरे घटती मानी जाती है। ( jainknowledge.com)
जैन मान्यता के अनुसार पंचम काल की अवधि 21,000 वर्ष मानी गई है। यह भगवान महावीर के निर्वाण के बाद आरंभ हुआ माना जाता है। ( jainknowledge.com)
इस काल की विशेषताएँ सामान्यतः ये बताई जाती हैं:
- तीर्थंकरों का प्रत्यक्ष अवतरण नहीं होता।
- साधना, संयम और धर्मपालन कठिन हो जाता है।
- जीवन में दुःख, कलह और अधर्म बढ़ता है। ( jainknowledge.com)
यदि आप “पंचम कुल” से किसी विशेष जैन वंश, गच्छ, शाखा या परंपरा का इतिहास पूछ रहे हैं, तो वह शब्द अलग संदर्भ में हो सकता है।