Pratikraman me kitne dosh hai
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Pratikraman में मुख्य रूप से 18 प्रकार के दोषों (अठारह पापस्थानों) का उल्लेख किया जाता है, जिन्हें 'अठारह पापस्थान' कहा जाता है। प्रत्येक प्रतिक्रमण में इन दोषों को स्मरण कर, उनके प्रति क्षमा याचना की जाती है और उनसे बचने का संकल्प लिया जाता है। ये अठारह दोष (पापस्थान) इस प्रकार हैं:
- हिंसा (Violence)
- असत्य (Untruth)
- चोरी (Stealing)
- कुशील (Unchastity)
- परिग्रह (Possessiveness)
- क्रोध (Anger)
- मान (Pride)
- माया (Deceit)
- लोभ (Greed)
- राग (Attachment)
- द्वेष (Aversion)
- कलह (Quarrelling)
- अभ्याख्यान (Accusation)
- पैशुन्य (Gossip/Slander)
- रति-अरति (Liking and disliking)
- पर-परिवाद (Criticizing others)
- मायामृद (Hypocrisy)
- मिथ्यात्व (Wrong belief)
इन दोषों का स्मरण और प्रायश्चित प्रत्तिक्रमण के प्रमुख अंग हैं।