Pausadh me kitne dosh hai
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पौषध (Pausadh) व्रत जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसमें श्रावक-श्राविका एक दिन के लिए मुनियों की तरह आचरण करते हैं। पौषध का पालन करते समय कुछ दोष (त्रुटियाँ) बताए गए हैं, जिनसे बचना चाहिए। जैन आगमों के अनुसार पौषध में मुख्यतः 28 दोष (अट्ठावीस दोष) माने गए हैं।
पौषध के 28 दोष इस प्रकार हैं:
- राग (आसक्ति रखना)
- द्वेष (दुश्मनी या घृणा रखना)
- माया (छल करना)
- लोभ (लालच रखना)
- कपट (फरेब करना)
- मिथ्या (झूठ बोलना)
- परिग्रह (संग्रह करना)
- हिंसा (किसी भी रूप में प्राणी को कष्ट देना)
- चोरी (चोरी करना)
- कुशील (कुसंगति/अनुचित व्यवहार)
- परिग्रह-परिमाण का उल्लंघन
- अपरिग्रहता का अभाव
- अभक्ष्य का सेवन
- रात्रि भोजन
- विकल्प पूर्वक भोजन
- अतिथि का तिरस्कार
- मलिनता/अशुद्धता
- आसन का दोष (अशुद्ध स्थान पर बैठना)
- अधिक बोलना
- अनावश्यक कार्य करना
- मन में बुरे विचार लाना
- स्मरण दोष (भूतकाल के विषयों का स्मरण)
- आलस्य
- मूर्च्छा (मद एवं प्रमाद)
- अधर्म में प्रवृत्ति
- संकल्प दोष
- आज्ञा का उल्लंघन
- व्रत का अपमान
ये दोष पौषध व्रत का पालन करते समय त्यागने योग्य हैं। पौषध व्रत का सही लाभ तभी मिलता है जब इन दोषों से बचा जाए और संयमपूर्वक व्रत का पालन किया जाए।
संदर्भ:
- तत्त्वार्थ सूत्र,
- पौषध विधि,
- जैनाचार ग्रंथ
यदि आपको किसी विशेष दोष के बारे में विस्तार से जानना है, तो कृपया बताएं।