शहद के एक बुंद के भक्षण से कितना पाप लगता हैं?
जैन धर्म के अनुसार, शहद (मधु) का सेवन करना अत्यंत पापपूर्ण माना गया है। यह इसलिए क्योंकि शहद में अनगिनत सूक्ष्म जीव होते हैं, और उसकी प्राप्ति के समय भी असंख्य जीवों का संहार होता है। एक बूंद शहद के सेवन से जितने भी जीव उसमें होते हैं, उन सभी की हिंसा का पाप लगता है। ग्रंथों में कहा गया है कि "मधु अनन्तकाय जीव का समूह है", अर्थात् इसमें अनंत जीव होते हैं।
इसलिए, जैन आगमों के अनुसार, शहद के एक बूंद के भक्षण से अनंत जीवों की हिंसा का पाप लगता है। यही कारण है कि सभी जैन साधु-साध्वियाँ, श्रावक-श्राविकाएँ शहद का त्याग करते हैं और इसे पंच महाविकारों (मधु, मांस, मद्य, माखन, अंडा) में गिना गया है।
संक्षेप में: शहद की एक बूंद के भक्षण से अनंत जीवों की हिंसा का पाप लगता है, जो अत्यंत गंभीर है।