नारायण और बलभद्र कौन होता है
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जैन धर्म में नारायण और बलभद्र दो प्रमुख षलाकापुरुषों में आते हैं।
1) नारायण (वासुदेव)
- ये अत्यंत पराक्रमी, वीर और धर्मरक्षक महापुरुष होते हैं।
- इनका कार्य अधर्म और अत्याचार का नाश करना होता है।
- जैन मान्यता में हर चक्र में 9 वासुदेव, 9 बलदेव और 9 प्रतिवासुदेव होते हैं।
- नारायण को प्रायः वासुदेव भी कहा जाता है।
2) बलभद्र (बलदेव)
- ये नारायण के बड़े भाई या सहचर होते हैं।
- ये शांति, करुणा, संयम और धर्म के पक्षधर होते हैं।
- बलभद्र युद्धप्रिय नहीं होते, लेकिन अत्यंत बलवान और सम्माननीय होते हैं।
- जैन परंपरा में इन्हें बलदेव भी कहा जाता है।
संक्षेप में
- नारायण = वासुदेव = युद्ध करने वाले धर्मरक्षक
- बलभद्र = बलदेव = शांत, संयमी, सहायक महापुरुष
जैन कथाओं में इन दोनों का संबंध बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, और ये षट्लक्ष/षलाकापुरुषों की परंपरा का हिस्सा हैं।