नारायण और बलभद्र कौन है
जैन परंपरा में नारायण और बलभद्र “शलाका पुरुष” के दो महत्वपूर्ण वर्ग हैं।
1) नारायण कौन हैं?
जैन ग्रंथों में नारायण को वासुदेव भी कहा जाता है। वे अत्यंत शक्तिशाली, वीर और राजकीय योद्धा होते हैं। उनका कार्य अधर्म और अत्याचार का नाश करना होता है। परंतु जैन दृष्टि में वे भी संसारी जीव ही हैं, इसलिए वे मोक्ष प्राप्त नहीं होते जब तक सम्यक् ज्ञान, दर्शन और चारित्र न हो।2) बलभद्र कौन हैं?
बलभद्र को बलदेव भी कहा जाता है। वे भी महान, शांत, धर्मनिष्ठ और संयमी व्यक्तित्व वाले होते हैं। जैन परंपरा में बलभद्र को नारायण के भाई या निकट सहयोगी के रूप में माना जाता है। वे अधिक सात्त्विक और अहिंसक स्वभाव के होते हैं।3) दोनों में मुख्य अंतर
- नारायण / वासुदेव: शक्ति, युद्ध और दुष्टों का संहार करने वाले
- बलभद्र / बलदेव: शांत, धर्मप्रिय और अधिक अहिंसक स्वभाव वाले
4) जैन मान्यता
जैन धर्म में ये दोनों तीर्थंकर नहीं हैं। ये शलाका पुरुषों की श्रेणी में आते हैं, यानी ऐतिहासिक और विशेष पुण्यवान महापुरुष। इनके साथ प्रायः प्रतिनारायण या प्रति-वासुदेव का भी उल्लेख आता है, जो नारायण के प्रतिद्वंदी होते हैं।संक्षेप में: नारायण = वासुदेव, शक्तिशाली योद्धा बलभद्र = बलदेव, शांत और धर्मनिष्ठ महापुरुष