Ratno ki versa nit hoti hans chuge bs moti moti . Kis chalisa ya bhajan me aata hai
यह पंक्ति श्री वर्धमान स्तोत्र में आती है, न कि किसी प्रचलित “चालीसा” में। इसमें भगवान महावीर के गर्भ-कल्याणक का वर्णन है, जैसे “गर्भ समय के कल्याणक में, प्रतिदिन रत्नों की वर्षा”। ( jainstavan.in)
आपने जो “हंस चुगे बस मोती मोती” कहा है, वह जैन भजन-परंपरा में हंस के उदाहरण के रूप में आता है; इसी भाव वाली पंक्ति “हंसा तो मोती चुगैं” जैसे स्तवन/भजन में मिलती है। ( oshofragrance.org)
अगर आप चाहें, मैं इसी स्तवन/भजन का पूरा शुद्ध पाठ भी दे सकता हूँ।