Roop anupam budhi ra sagar pura punvanta vans ujagar ye line kisme aati hai
यह पंक्ति किसी जैन स्तवन/भजन की भक्तिपूर्ण शैली की लगती है, लेकिन अभी जो उपलब्ध शुद्ध जैन पाठ मिले, उनमें यह सटीक पंक्ति मुझे साफ़ तौर पर नहीं मिली। जैन स्तवनों में भगवान के रूप, बुद्धि, वंश/गुण का इस तरह गुणगान अक्सर मिलता है। ( jainpuja.com)
अगर आप इसका पूरा पद भेज दें, तो मैं इसकी सही पहचान बता दूँगा।